तिरंगा यात्रा में बच्चों की सेहत से खिलवाड़ : भीषण गर्मी में बीमार हुए स्कूली बच्चे, प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन पर उठे गंभीर सवाल,
उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश के देवरिया और महोबा जिलों में आयोजित तिरंगा यात्रा के दौरान भीषण गर्मी और अव्यवस्था के कारण कई स्कूली बच्चों के बीमार होने की बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। सत्तारूढ़ दल की इस राजनीतिक रैली में उमस और तेज धूप के बीच मासूमों को घंटों खड़ा रखा गया, जिससे प्रशासन की भारी संवेदनशीलता और लापरवाही उजागर हुई है।कार्यक्रम स्थल पर पीने के पानी, जलपान और प्राथमिक चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव देखा गया। राजनीतिक रैलियों में भीड़ जुटाने के लिए बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को दांव पर लगाना पूरी तरह अक्षम्य है। आलोचकों का कहना है कि राष्ट्रध्वज हमारे सामूहिक गौरव का प्रतीक है, न कि शक्ति प्रदर्शन का जरिया। देशभक्ति दिल से होती है, जिसे जबरदस्ती धूप में तपाकर साबित नहीं किया जा सकता।
अभिभावकों का फूटा गुस्सा : घटना से आक्रोशित अभिभावकों ने प्रशासन और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। पीड़ित बच्चों के माता-पिता का कहना है कि उन्हें बिना पूर्व सूचना और अनुमति के बच्चों को इस तपती धूप में भेजा गया। एक अभिभावक ने बताया, “स्कूलों ने बच्चों पर यात्रा में शामिल होने का दबाव बनाया था। भीषण गर्मी में पानी तक का इंतजाम नहीं था, जिससे बच्चे बेहोश होने लगे। अगर बच्चों को कुछ गंभीर हो जाता, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता?” कई परिवारों ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासनिक लीपापोती और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण
आयोग का सख्त रुख : इस घटना पर स्थानीय प्रशासन ने सफाई देते हुए कहा है कि कार्यक्रम में पानी और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की गई थी, लेकिन अत्यधिक उमस के कारण कुछ बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। प्रशासन ने मामले की जांच के लिए एक आंतरिक समिति गठित की है।दूसरी ओर, बाल अधिकार विशेषज्ञों और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के दिशानिर्देशों के अनुसार, किसी भी राजनीतिक या गैर-शैक्षणिक गतिविधि में स्कूली बच्चों का उपयोग करना उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। नियमों के मुताबिक, भीषण मौसम (लू या अत्यधिक उमस) के दौरान बच्चों को खुले आसमान के नीचे घंटों खड़ा रखना बाल उत्पीड़न की श्रेणी में आता है।
विपक्षी नेताओं ने साधा निशाना, सरकार को घेरा : मुख्य विपक्षी दल के नेताओं ने इस घटना की तीखी निंदा करते हुए इसे “सत्ता का अहंकार” और “अमानवीय कृत्य” करार दिया है। नेताओं का कहना है कि अपनी रैलियों में कृत्रिम भीड़ दिखाने के लिए मासूम बच्चों के स्वास्थ्य को दांव पर लगाना बेहद शर्मनाक है। विपक्ष ने मांग की है कि इस घोर लापरवाही के जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों को तुरंत निलंबित किया जाए और पीड़ित बच्चों के परिवारों को मुआवजा दिया जाए। विपक्षी प्रवक्ताओं ने बयान जारी कर कहा कि सरकार तिरंगे का राजनीतिकरण कर रही है और अपनी कमियों को छिपाने के लिए स्कूली बच्चों का ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रही है।
