रिपोर्टर – बिजेंद्र शीर्षवाल
हरिद्वार धर्मनगरी मां गंगा के तट पर किसान महाकुंभ के मंच पर फिल्म गानों पर महिला डांसरो ने लगाए ठुमके, गंगा तट की मर्यादा को किया तार-तार, गंगा तट की मर्यादा पर लोगों ने उठाए सवाल,
हरिद्वार : धर्मनगरी हरिद्वार में भारतीय किसान यूनियन क्रांति के किसान महाकुंभ आयोजन के दौरान स्टेज पर फिल्मी गानों पर महिला डांसरो के डांस करने को लेकर अब सवाल उठने शुरू हो गए हैं, धर्मनगरी माँ गंगा के घाट पर इस तरह के आयोजन को लेकर अब स्थानीय लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
धर्मनगरी हरिद्वार में हर की पैड़ी के सामने स्थित वीआईपी घाट पर भारतीय किसान यूनियन क्रांति के किसान महाकुंभ से महिला डांसर के फिल्मी गीतों पर डांस करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ लोग डांसर पर नोट उड़ाते और मंच के सामने डांस करते भी दिखाई दे रहे हैं। इसे लेकर धार्मिक गरिमा और सांस्कृतिक मर्यादाओं पर सवाल उठने लगे हैं।
वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और धार्मिक संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि हर की पैड़ी और गंगा तट करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं। ऐसे स्थानों पर होने वाले आयोजनों में धार्मिक और सामाजिक मर्यादाओं का पालन होना चाहिए।
घटना के बाद अब कार्यक्रम की अनुमति, उसकी शर्तों और प्रशासन की निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों ने पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट करने और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार भारतीय किसान यूनियन क्रांति ने हर की पैड़ी के सामने स्थित वीआईपी घाट पर किसान महाकुंभ आयोजित किया था। इस आयोजन का उद्देश्य किसानों की समस्याओं, कृषि नीतियों, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी), सिंचाई, बिजली, मुआवजा और खेती से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा करना था।
लेकिन वायरल वीडियो में मंच पर फिल्मी गीतों पर महिला डांसर प्रस्तुति देती दिखाई दे रही हैं। मंच के सामने मौजूद कई लोग डांस करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में कुछ लोग डांसर पर नोट उड़ाते दिखाई देते हैं, जबकि कुछ लोग जमीन पर लेटकर और झूमते हुए नाचते दिख रहे हैं। इन्हीं दृश्यों को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
वीडियो सामने आने के बाद कई स्थानीय लोगों और धार्मिक संगठनों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि हर की पैड़ी और उसके आसपास का क्षेत्र केवल पर्यटन स्थल नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं। उनका कहना है कि ऐसे स्थानों पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में धार्मिक और सामाजिक मर्यादाओं का पालन होना चाहिए। यदि किसी संगठन को सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना है तो उसके लिए अन्य उपयुक्त स्थानों का चयन किया जा सकता है। गंगा तट और हर की पैड़ी के सामने इस तरह की गतिविधियां श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत कर सकती हैं।
घटना के बाद लोगों ने यह सवाल भी उठाए हैं कि कार्यक्रम की अनुमति किन शर्तों पर दी गई थी और क्या आयोजकों ने अनुमति की सभी शर्तों का पालन किया। लोगों का कहना है कि धार्मिक स्थल के निकट किसी भी आयोजन की अनुमति देने के साथ उसकी गतिविधियों की निगरानी भी प्रशासन की जिम्मेदारी होती है।
स्थानीय लोगों ने वायरल वीडियो की जांच कर पूरे मामले को सार्वजनिक करने और यदि किसी नियम या अनुमति की शर्त का उल्लंघन हुआ हो तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि धार्मिक स्थलों की गरिमा बनाए रखने के लिए भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और सख्त निगरानी जरूरी है।
