बाघ शिकार मामले में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, रेंजर समेत 03 वनकर्मी सस्पैंड, उच्चस्तरीय जांच के आदेश,
हरिद्वार : दिनांक 26 मई उत्तराखंड वन विभाग ने वन्यजीव अपराधों के खिलाफ अपनी ‘जीरो-टॉलरेंस’ नीति के तहत एक बड़ा कदम उठाया है। हरिद्वार वन प्रभाग के अंतर्गत श्यामपुर रेंज में दो बाघों के अवैध शिकार के मामले में प्रथम दृष्टया कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही और ढिलाई बरतने के आरोप में वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) विनय कुमार राठी, संबंधित फॉरेस्टर तथा वन आरक्षी (फॉरेस्ट गार्ड) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
प्रमुख वन संरक्षक (HoFF) द्वारा जारी निलंबन आदेश के मुताबिक, यह कार्रवाई मुख्य वन संरक्षक (गढ़वाल) की रिपोर्ट और संस्तुति के आधार पर उत्तरांचल सरकारी सेवक नियमावली, 2003 के तहत की गई है।
दरअसल बीते दिनों हरिद्वार वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज के सजनपुर बीट में दो बाघों के शव मिलने से सनसनी फैल गई थी। शुरुआती जांच में यह मामला शिकार का निकला। वन विभाग की जांच में सामने आया कि शिकारियों ने बाघों को मारने के लिए जहर का इस्तेमाल किया था। मृत बाघ पंजे काट लिए थे। घटना के बाद वन विभाग ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, जबकि अन्य आरोपी फरार हो गए थे। हालांकि बाद में तीन अन्य लोगों भी गिरफ्तार कर लिया गया था।
वन विभाग की त्वरित कार्रवाई के चलते अब तक इस क्रूर घटना में शामिल 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा चुका है। फरार आरोपियों की धरपकड़ और गायब अंगों (पंजों) की बरामदगी के लिए एसटीएफ और वन विभाग की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।
गश्त और निगरानी तंत्र पर उठ रहे सवाल-
पूर्व में हरिद्वार वन प्रभाग में हाथियों की मौत और सांप के जहर की तस्करी के मामले सामने आए थे। बार-बार मिल रही इन इनपुट्स के बावजूद क्षेत्रीय स्तर पर प्रभावी गश्त न होने को विभाग ने बेहद गंभीरता से लिया है।
इस गंभीर प्रकरण का संज्ञान राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने भी लिया है। केंद्रीय टीम के जल्द ही उत्तराखंड पहुंचने की संभावना है, जिसके साथ वन विभाग पूरा समन्वय स्थापित कर जांच को आगे बढ़ाएगा।
प्रमुख वन संरक्षक (HoFF) का कड़ा संदेश देते हुए कहा,”वन्यजीवों की सुरक्षा हमारे लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। श्यामपुर की घटना निगरानी तंत्र की विफलता को दर्शाती है, जिसे कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह निलंबन केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद जवाबदेही तय कर दोषियों के खिलाफ बर्खास्तगी और कानूनी कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।
