एकड़ सराय डंपिंग जोन पर भाजपा का धरना: व्यवस्था पर सवाल या चुनावी टाइमिंग का खेल,
हरिद्वार : जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे राजनेताओं को जनता की बुनियादी समस्याओं और डंपिंग जोन से उठती ‘बदबू’ की याद सताने लगी है। नगर निगम हरिद्वार के अंतर्गत एकड़ सराय स्थित मुख्य कूड़ा डंपिंग जोन को लेकर पिछले कुछ दिनों से सियासत चरम पर है।
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लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा यक्ष प्रश्न खड़ा कर दिया है : जब पिछले 3-4 महीनों से इस डंपिंग जोन से मशीनों द्वारा वैज्ञानिक पद्धति (लीगेसी वेस्ट मैनेजमेंट) से लगातार कूड़ा हटाने का काम जारी है, तो फिर सत्तारूढ़ दल भाजपा के ही दिग्गज नेताओं को अपनी ही सरकार और निगम प्रशासन के खिलाफ सड़क पर क्यों उतरना पड़ा।
राजनैतिक विश्लेषक इस प्रदर्शन की ‘टाइमिंग’ को लेकर गंभीर तर्क दे रहे हैं। बुद्धिजीवियों का मानना है कि यदि भाजपा नेताओं को स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य की वाकई इतनी चिंता थी, तो यह धरना-प्रदर्शन 5-6 महीने पहले होना चाहिए था। तब दबाव बनता तो डंपिंग जोन कब का साफ हो चुका होता। अब, जब डंपिंग जोन से राहत कार्य अपने अंतिम दौर में है, तब अचानक किया गया यह प्रदर्शन जन-सरोकार कम और चुनावी लाभ लेने की कोशिश अधिक दिखाई देता है।
अस्थायी समाधानों पर उठे तीखे सवाल : एकड़ सराय में धरना समाप्ति के दौरान पूर्व कैबिनेट मंत्री और भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष स्वामी यतीश्वरानंद ने कहा कि क्षेत्रवासियों की मांग जायज है, इसके लिए मैने मौके पर अधिकारीयों को बुलाया है उन्होंने आश्वासन दिया कि 6 महीने में इस कुडे के ढेर को हटा दिया जायेगा और डंपिंग जोन की दिवारो को और ऊंचा करा दिया जायेगा। साथ ही गंदे पानी की निकासी के लिए नाले का निर्माण किया जायेगा और हर रोज कीटनाशक दवाई का छिड़काव होता रहेगा। लेकिन डंपिंग जोन का स्थानांतरण इतना आसान नहीं है लेकिन हाँ होना चाहिए इसके लिए में अधिकारियों से बात करूंगा और क्षेत्रवासियों की समस्याओं के समाधान के लिए में उनके साथ हूँ।
लेकिन प्रशासन के इन दावों पर जनता ने अपनी तार्किक आपत्ति दर्ज कराई है : स्थानीय लोगों का सीधा सवाल है कि क्या कंक्रीट की दीवारें ऊंची कर देने से हवा में घुलती गंदी बदबू को रोका जा सकता है? क्या हवा के जरिए फैलने वाले बैक्टीरिया और घातक बीमारियों का संक्रमण दीवारों की ऊंचाई देखकर रुक जाएगा? जब तक कूड़े का पूरी तरह निस्तारण नहीं होता, तब तक ऐसे अस्थायी और सतही इंतजामों से जनता को गंभीर स्वास्थ्य संकट से कैसे बचाया जा सकता है? अपनी ही सरकार के तंत्र को कटघरे में खड़ा करने वाले इस प्रदर्शन ने अब विपक्ष को भी बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा थमा दिया है।
