हरिद्वार का बाघ हत्याकांड : कटे पैर और बाघिनी अब तक गायब, वन विभाग की कार्रवाई पर उठ रहे बड़े सवाल,
हरिद्वार : श्यामपुर रेंज के बहुचर्चित बाघ हत्याकांड में वन विभाग की कार्रवाई पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। घटना के लगभग 8 दिन बीत जाने के बावजूद वन विभाग अब तक दोनों मृत बाघों के कटे हुए पैर, इस्तेमाल किए गए धारदार हथियार और कथित रूप से लापता बाघिनी को बरामद नहीं कर पाया है। मामले में लगातार हो रही देरी ने वन विभाग की कार्यशैली और जंगलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुख्य आरोपी आमिर हमजा उर्फ मियां ने कोर्ट में किया सरेंडर,
बताया जा रहा है कि फरार चल रहा मुख्य आरोपी आमिर हमजा उर्फ मियां लगातार वन विभाग की टीम को चकमा देता रहा। विभाग की टीमें उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश देती रहीं, लेकिन हर बार निराशा हाथ लगी। आखिरकार आरोपी ने सोमवार को रोशनाबाद स्थित कोर्ट में सरेंडर कर दिया। अब वन विभाग आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी में जुटा है, ताकि पूरे शिकार नेटवर्क और घटना से जुड़े अन्य राज सामने लाए जा सकें।
मृत भैंस पर लगाया गया था जहरीला पदार्थ,
गौरतलब है कि सजनपुर बीट में दो बाघों की जहरीला पदार्थ देकर हत्या किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया था। जंगल में मिले दोनों बाघों के शवों की जांच के दौरान खुलासा हुआ कि मृत भैंस पर जहरीला पदार्थ लगाया गया था, जिसे खाने के बाद बाघों की मौत हुई। जांच में यह भी सामने आया कि मौत के बाद बाघों के पैर काटे गए, जिससे पूरे मामले ने वन्यजीव तस्करी और शिकार गिरोह की आशंकाओं को और गहरा कर दिया।
अभी तक 04 आरोपी किए जा चुके गिरफ्तार,
वन विभाग इस मामले में अब तक आलम उर्फ फम्मी, आशिक, जुप्पी और यूसुफ समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुका है। वहीं, आमिर हमजा को इस पूरे शिकार कांड का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, जहरीला चारा रखने की साजिश उसी ने रची थी और बाघों की मौत के बाद सबूत मिटाने के लिए उनके पैर काटे गए।
कटे हुए अंग व बाघिन अभी लापता,
हालांकि, इतने बड़े ऑपरेशन के बावजूद अब तक न तो कटे हुए अंग बरामद हो पाए हैं और न ही घटना में इस्तेमाल हथियार। इसके अलावा एक बाघिनी के लापता होने की चर्चा भी पूरे मामले को और गंभीर बना रही है। वन विभाग को उम्मीद है कि मुख्य आरोपी से रिमांड पर पूछताछ के दौरान कई बड़े खुलासे हो सकते हैं और शिकार गिरोह के अन्य सदस्यों तक भी पहुंच बनाई जा सकती है।
पूरे प्रकरण में विभागीय लापरवाही आई सामने,
इस पूरे प्रकरण में विभागीय लापरवाही भी सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए श्यामपुर वन रेंज अधिकारी समेत दो कर्मचारियों को सस्पेंड किया जा चुका है। लगातार उठ रहे सवालों के बीच अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या वन विभाग केवल निचले कर्मचारियों पर कार्रवाई कर मामला शांत करेगा या फिर जंगलों में सक्रिय पूरे शिकार नेटवर्क और विभागीय लापरवाही की गहराई तक जांच पहुंच पाएगी।
वन विभाग की जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न ,
स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते जंगलों में निगरानी मजबूत होती और अवैध गतिविधियों पर सख्ती बरती जाती, तो शायद देश की वन संपदा माने जाने वाले बाघों की जान बचाई जा सकती थी। अब यह मामला केवल दो बाघों की हत्या तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि जंगलों की सुरक्षा व्यवस्था और वन विभाग की जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न बन चुका है।
