UGC News : यूजीसी नियमों में बदलाव के विरोध की आंच, चिंगारी से ज्वाला बन गई है. यूजीसी के इस समानता विनियम 2026 से उच्च शैक्षणिक संस्थानों में बहस तेज हो गई है. केंद्र सरकार किसी भी भेदभाव से इनकार कर रही है, जबकि जनरल कैटेगरी के छात्र विरोध कर रहे हैं।
मंगलवार को दिल्ली में यूजीसी दफ्तर का घेराव हुआ. इस बीच नए नियमों को लेकर राजनीतिक दलों, प्रशासनिक अधिकारियों का असंतोष भी तेजी से बढ़ा है।
सूत्रों के अनुसार यूजीसी के नोटिफिकेशन का मुद्दा आज आल पार्टी मीटिंग में भी उठा. इस दौरान आजाद समाज पार्टी के संस्थापक और इकलौते सांसद (नगीना) चंद्र शेखर ने कानून का समर्थन किया है. चंद्रशेखर ने कहा, ‘सालों से दलित और पिछड़ों को दबाया गया, चलिए किसी सरकार ने तो कोई कदम उठाया. आज उन तमाम नेताओं को पहचानने का समय है जो दलित और पिछड़ों की राजनीति करते हैं, लेकिन चुप हैं. अब देखना ये होगा कि कैसे लोगों को न्याय मिलेगा, क्योंकि अधिकांश विश्वविद्यालय में सामान्य वर्ग के ही वाइस चांसलर हैं।
चंद्र शेखर ने इससे पहले अपने एक बयान में कहा, ‘SC-ST OBC होने का दर्द SC-ST OBC होके ही समझा जा सकता है. गाइडलाइन SC-ST OBC के लोगों ने नहीं बनाई, समिति ने बनाई है. जिस प्रकार से लगातार उच्च शैक्षणिक संस्थाओं में इस तरह के अपराधों की संख्या बढ़ रही है उसके आधार पर बनाई है. जो लोग विरोध कर रहे हैं उन्होंने शायद पढ़ा नहीं है क्योंकि उसमें आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के वर्गों को भी जोड़ा है, दिव्यांग जनों को भी जोड़ा है. केवल SC-ST नहीं है OBC को भी जोड़ा है. उसमें जब EWS के छात्रों को जोड़ दिया गया है तो उनको भी जोड़ दिया गया है तो सामान्य वर्ग को क्या दिक्कत है।
दिल्ली, यूपी समेत देश के कई हिंदी पट्टी राज्यों में छात्र और सामाजिक समंगठन यूजीसी के विरोध में सड़कों पर उतरे हैं. राजनीतिक दलों के अंदर इस्तीफे शुरू हो चुके हैं. इस तकरार पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया है कि किसी को भी गलत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं रहेगा. उन्होंने आगे ये भी कहा कि राज्य सरकार के तरफ से जो होगा वो करेंगे यह सब कुछ तो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुआ है. धर्मेंद्र प्रधान ने आगे कहा कि कोई भेद भाव नहीं होगा. कोई भी किसी के ऊपर अत्याचार या भेद भाव नहीं कर सकेगा। मोदी सरकार में संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजीजू का कहना है कि यूजीसी समेत जो भी विषय सदन के पटल पर आएंगे उन पर चर्चा की जाएगी. फिलहाल बजट सत्र है , बजट पेश हो और राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा हो, ये जरूरी है।
RLD सांसद राजकुमार सांगवान ने कहा, ‘यूजीसी पर केवल एक सांसद ने बात उठाई थी. फिलहाल ये कोई विषय नहीं है. एक अधिकारी ने इस्तीफा दिया है, अब ये देखना होगा कि उन्होंने क्यों दिया. कहीं उनका ये कदम किसी भावी राजनीति या घटनाक्रम से प्रेरित तो नहीं हैं. कुछ लोग बात उठा रहे हैं लेकिन कोई राजनैतिक पार्टी अभी तक इस मामले में कुछ नहीं बोली है। उद्धव सेना (उबाठा) की नेता और राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने यूजीसी की नई गाइडलाइंस का खुलकर विरोध किया है. उन्होंने कहा है कि इस गाइडलाइंस से आपने पहले ही तय कर दिया कि कौन दोषी है. नेचुरल कोर्स ऑफ जस्टिस के नाम पर जो भी नए नियम लाए गए हैं उससे सामाजिक असमानता और बढ़ेगी. इस मुद्दे पर मेरा स्टैंड क्लियर है. मैं इस मुद्दे पर खुलकर सरकार के खिलाफ हूं. एजुकेशनल कैंपस में भेदभाव नहीं होना चाहिए. लेकिन पहले ही एक वर्ग को दोषी मान लेना कहां का न्याय है. ये मामवा मैं संसद में उठाऊंगी, चाहे कोई मुझे ट्रोल करे या फिर गालियां दे।
आरजेडी ने यूजीसी कानून का समर्थन किया है. आरजेडी प्रवक्ता शक्ति यादव ने कहा ये आरक्षित वर्ग को सुरक्षा कवच वाला कानून है. कुछ वर्ग हाय तौबा मचा रहे हैं और केंद्र सरकार ने चुप्पी साध रखी है।
